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A |     परिमल सिंह, भागलपुर। Trump tariff updates भागलपुर का रेशमी कारोबार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय संकट की चपेट में आ गया है। अमेरिका सरकार द्वारा कपड़ों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद यहां के निर्यातक (व्यवसायी) मुश्किल में है। स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये का तैयार माल गोदामों में डंप है। बड़े निर्यातकों ने भी दिए गए आर्डर उठाने से हाथ खींच लिया है।,बिहार बुनकर कल्याण समिति के पूर्व सदस्य अलीम अंसारी बताते हैं कि भागलपुर से तसर कटिया, कटिया-कटिया, मटका, घिचा, झूड़ी सिल्क आदि कपड़े अमेरिका भेजे जाते थे। वहां इन कपड़ों का इस्तेमाल रेडीमेड गारमेंट्स और फर्निशिंग आइटम्स में होता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में टैरिफ लगने से वहां का बाजार महंगा हो गया है। इसीलिए डिमांड कम हो गयी है। पुराने आर्डर रोक दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि जिले में 75 करोड़ रुपये का तैयार माल डंप पड़ा हुआ है।,पुरैनी बुनकर समिति के अध्यक्ष अफजल आलम का कहना है कि भागलपुर से मटका सिल्क के बने फर्निशिंग आइटम अमेरिका में काफी पसंद किए जाते थे। लेकिन पिछले एक महीने से कोई शिपमेंट नहीं गया है। अफजल ने बताया कि अमेरिका से डिमांड बंद होने के कारण बुनकरों के अलावा रंगाई, प्रिंटिंग और पैकिंग से जुड़े कारीगर भी बेरोजगारी की कगार पर पहुंच गए हैं। वहीं नया बाजार स्थित सिल्क कारोबारी सुकेश अग्रवाल ने बताया कि अचानक से धागे की बिक्री घट गई है। कारोबार मंदा हो चुका है।,चंपानगर तांती बाजार के बुनकर हेमंत कुमार ने बताया कि हाल के कुछ महीने बुनकरों के लिए बहुत कठिन रहे हैं। यहां के बुनकर पीढ़ियों से इस धंधे से जुड़े हुए हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने उनके भविष्य को संकट में डाल दिया है। बंग्लादेश की सीमा सील होने के कारण साड़ी, लूंगी, धोती आदि पहले ही डंप हो चुके थे। अब अमेरिका के टैरिफ ने सिल्क उद्योग को संकट में डाल दिया है।,उन्होंने कहा कि भागलपुर के बड़े निर्यातक भी इस संकट से जूझ रहे हैं। उनके अनुसार, आर्डर कैंसिल होने से लाखों रुपये का निवेश फंस गया है। कई निर्यातक अब मजदूरों की संख्या कम करने पर विचार कर रहे हैं। हेमंत ने कहा कि एक ओर धागे की कीमत बढ़ रही है, वहीं यहां के कपड़े की कीमत घटने लगी है।,ऐसी स्थिति में बुनकर अब यह सोचने को मजबूर हो गए हैं कि वे इस पेशे को छोड़कर कोई दूसरा रोजगार तलाशें। अलीम अंसारी ने कहा, भागलपुर की पहचान ही सिल्क है। अगर यही धंधा चौपट हो गया, तो भागलपुर की शान खतरे में पड़ जाएगी। टैरिफ के कारण कई बुनकर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।,आर्थिक मामलों के जानकार सीए प्रदीप कुमार झुनझुनवाला का कहना है कि अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने से दवा, हीरा और हस्तशिल्प उद्योग भी प्रभावित होने की संभावना है। देश में जो दवा का उत्पादन होता है, उसका 50 प्रतिशत अमेरिका को जाता है। यहां का हीरा 75 प्रतिशत और हस्तशिल्प 64 प्रतिशत का निर्यात अमेरिका को किया जाता है।。            今年以来,全球人工智能(AI)算力基础设施建设提速,带动铜、铝、锡、钽、铟、钼等有色金属需求集中释放,相关品种价格大幅上行,市场迎来了“算力金属”行情。       中国有色金属工业协会统计显示,今年上半年,锡、钽、铟价格分别上涨40%、158%、60%;铜、铝价格同比分别上涨31.4%、18.8%。       业内将“算力金属”划分为两大类别:        一类是支撑AI算力基础设施的核心大宗金属铜、铝,二者作为数据中心供电、散热的基础材料,构筑起算力网络的主干;        另一类是钼、锡、铟、锗、镓等小金属,这类金属广泛应用于先进封装、光通信、存储芯片环节,是算力产业链不可或缺的“工业维生素”。大涨158%!“元素周期表”,为何持续火爆?        铜合金        “本轮上涨,是供给刚性约束与新兴产业需求扩张共同作用的结果。”中国有色金属工业协会副秘书长兼重金属部(矿产资源办公室)主任段绍甫分析,在需求端,AI服务器、高速光模块、先进封装等环节,对“算力金属”形成了不可替代的实物消耗。       卓创资讯与富宝资讯铁合金高级分析师张秀华认为,供给端约束持续收紧:多国将相关品种纳入关键矿产管理,矿山投资、出口管控趋严;叠加矿山原矿品位持续下降,老矿逐步减产,新建矿山投产节奏难以匹配需求增长。

B |        与此同时,今年6月份施行的《中华人民共和国矿产资源法实施条例》(以下简称《条例》),将相关金属划入战略性资源目录,进一步强化了供给约束预期。大涨158%!“元素周期表”,为何持续火爆?        铝基材料        保障“算力金属”稳定供给,事关AI产业长远发展。工业和信息化部等八部门印发的《有色金属行业稳增长工作方案(2025—2026年)》提出,促进资源高效利用、提高资源保障水平。“十五五”规划纲要明确,加强战略性矿产资源勘探开发和储备,深入实施新一轮找矿突破战略行动。       依托政策引导,多家矿业上市公司加快并购布局,持续夯实算力相关矿产资源储备,稳固AI产业链上游供给底座。

C |        业内人士认为,企业并购整合优质矿产、适度扩产,有助于提升我国在全球资源市场的话语权,归集战略资源,打造自主可控供应链,支撑全球科技竞争。

D |        “《条例》提出构建产品、产能和产地储备相结合的战略性矿产资源储备体系,建立矿产资源供应安全预测预警工作体系,增强了有色金属资源安全保障能力。”段绍甫表示,与算力相关的有色金属,其上游矿产资源对外依存度较高,企业应增强供应链韧性。

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Published on:07:03:25